मिर्गी: मिथक और तथ्य

मिर्गी मिथक और तथ्य

मिर्गी यानी एपिलेप्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं। मिर्गी यानी एपिलेप्सी की बीमारी को लेकर आज भी समाज में भ्रांति फैली हुई है। कोई इसे भूत प्रेत का साया मानते हुए झाड़ फूंक कराता है तो कोई दौरा पड़ने पर पीडि़त को जूता सुंघाने लगता है। दोनों ही स्थिति मरीज के लिए खतरनाक है।

मिथक: मिर्गी एक पागलपन है और इसका इलाज पागलखाने में होना चाहिए।
तथ्य: मिर्गी पागलपन नहीं बल्कि दिमाग की एक बीमारी है और न्यूरोलॉजिस्ट इसका इलाज करते हैं।

मिथक: मिर्गी की बीमारी ठीक नहीं होती।
तथ्य: करीब 75% मरीजों को मिर्गी के अटैक से राहत मिल जाती है। ज्यादातर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं और उन्हें फिर दवा की भी जरूरत नहीं पड़ती। सर्जरी के जरिए भी मिर्गी ठीक हो जाती है।

मिथक: मिर्गी के अटैक के दौरान मरीज के मुंह में चम्मच डालना चाहिए।
तथ्य: अटैक के दौरान मुँह में कुछ नहीं डालें। मरीज को एक करवट में लिटा दें। जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल ले जायें।

मिथक: मिर्गी रोगी सामान्य जीवन नहीं जी सकते।
तथ्य: मिर्गी की बीमारी पीड़ित को पढ़ाई और कार्यस्थल पर अच्छा प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकती। इस रोग से पीड़ित लोग शादी कर सकते हैं, अपना परिवार बढ़ा सकते हैं। मिर्गी एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें दवाओं और दूसरे उपायों के द्वारा प्रबंधन करके सामान्य जीवन जिया जा सकता है। हां, ऐसे लोगों को ड्राइविंग और स्विमिंग से दूर रहना चाहिए।

डॉ. विक्रम बोहरा जयपुर के एक प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट हैं जो ब्रेन स्ट्रोक, रक्तस्राव, मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के उपचार में विशिष्ट हैं।